029/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
भले पुराने हों
गाड़ी के दोनों पहिए
साथ -साथ अच्छे लगते हैं।
एक धुरी पर
दोनों चलते
एक साथ चूँ चरर मरर
बिना तेल
घिस-घिस कर रेंगें
अपनी मंजिल नाप डगर
किंचित मन में
द्रोह नहीं है
साथ-साथ अच्छे फबते हैं।
अपनी कहें
सुनें सब उनकी
इसको कहते प्रेम सभी
वाद विवाद
न करते पल को
उर न विलग हो रंच कभी
करते याद
अतीत काल की
एक दूसरे को नवते हैं।
कब तक साथ
निभेगा सँग - सँग
कोई नहीं जानता इसको
हँस मुस्काकर
रहें साथ में
वृथा न करते जीवन रस को
खो जाते
अतीत में अपने
सोते कम अति जगते हैं।
शुभमस्तु !
13.01.2026◆5.45 आ०मा०
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