सोमवार, 12 जनवरी 2026

जीवन हो यह कर्म प्रधान [ गीतिका ]

 028/2026


      

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


हे     मानव   तव      मन     उचटे।

रहे       केन्द्र    पर     नित्य    डटे।।


बढ़े    परस्पर         नेह     असीम ,

मेल      एकता    से    न        हटे।


रीति        सनातन   भंग     न   हो,

उचित  नहीं    मनुजात         खटे।


जीवन   हो  यह      कर्म    प्रधान ,

रहें      मनुज  से     मनुज     सटे।


प्रबल   रखें        संकल्प       सभी,

रहें       जगत      में      छटे - छटे।


एक        रहें        कथनी -  करनी,

पल    भर    को  मन    नहीं  घटे।


'शुभम्'  अहं     से    जो     है   दूर,

मानवता        से       नहीं      कटे।


शुभमस्तु !


12.01.2026●10.45आ०मा०

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