009/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
आओ चलो अलाव जलाएँ।
दादी - बाबा को गरमाएँ।।
पूस-माघ की ठंड कड़ी है।
बढ़ी समस्या आज बड़ी है।।
काँप रही हैं भैंसें गायें।
आओ चलो अलाव जलाएँ।।
दादी लेटी ओढ़ रजाई।
मिल जाती है कुछ गरमाई।।
मोटा कंबल उन्हें ओढ़ाएं।
आओ चलो अलाव जलाएँ।।
स्वेटर कोट पहनकर बाबा।
ठंड नहीं का करते दावा।।
गरम पकौड़ी उन्हें खिलाएं।
आओ चलो अलाव जलाएँ।।
ठंडक का उपचार करें हम।
आग जलाएं कुछ होगी कम।।
ईंधन उपले खोजें लाएँ।
आओ चलो अलाव जलाएँ।।
पूस - माघ की ठंड न भाए।
नर-नारी को आँख दिखाए।।
थर-थर काँपें डर-डर जाएँ।
आओ चलो अलाव जलाएँ।।
03.01.2026 ◆12.45 प०मा०
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