शनिवार, 24 जनवरी 2026

जिह्वाएँ नर-मादा होतीं! [ नवगीत ]

 046/2026


          

 ©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


जिह्वाएँ 

नर-मादा होतीं

यह इतिहासी तथ्य नहीं है।


घर के अंदर

बाहर देखो

अद्भुत दिखें नमूने हैं

जीभ नहीं

रुकती नारी की

उठते बड़े   बगूले  हैं

अवसर पाकर

पुरुष बोलता

बात सत्य यह सभी कहीं है।


गतिरोधक 

मादा जिह्वा का

भूल गया नारी निर्माता

नॉन स्टॉप ही

चलना उसको

बता गए हैं विश्व विधाता

रोना-गाना

मिला साथ में

युद्धों की पटभूमि यहीं है।


स्वतः चलित

चुम्बक फिट मुख में

ब्रेक नहीं गतिरोध नहीं

कितना कुछ भी

कहे जीभ से

बदकथनी  का बोध नहीं

आँसू का हथियार 

न रुकता

पुरुषों के मुख जमा दही है।


शुभमस्तु !


22.01.2026◆3.00प०मा०

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