सोमवार, 12 जनवरी 2026

'राम तेरी माया' [ अतुकान्तिका ]

 025/2026


           


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


पूस-माघ   के  जाड़े में

कुछ गर्मी की बात करें

भुनी हुई  शकरकंदी

गर्मागर्म बेड़ई 

आलू की रसीली सब्जी

उर्द की दाल की 

खस्ता कचौड़ी।


करारी गर्म मूँगफली

तिलकुट्टी गज़क रेवड़ी

नई ब्याई भैंस की पेवसी

कुटे हुए तिल के लड्डू

छोड़ मत देना 

गाजर का गरम हलवा

जलवा ही जलवा।


भूल कैसे गए 

सरसों की भाजी

मूँग की दाल के पकौड़े

हरे धनिए की 

चटनी ताजी

बाजरे की रोटी

चने की पत्ती का साग

मिल गया तो

खुल गए भाग।


सुबह शाम

भपीली गर्म चाय

पालक बेसन के

गर्म-गर्म  पकौड़े

कैसे करें

तुम्हारे साथ

भरे जाड़े में अन्याय

फिर क्या है

जाड़े जी की बाय बाय।


मोटे ऊनी कम्बल

रजाई गद्दे का संबल

ठंड और कोट स्वेटर का

होने लगा दंगल

गर्मी का

 गरम-गरम सृजन।


पिड़कुलिया करे 

नीम के पत्तों में भजन:

'राम तेरी माया'

'राम तेरी माया'

धूप की प्रतीक्षा है

तूने कर दी क्यों

कोहरे की छाया

'राम तेरी माया'।


शुभमस्तु !


08.01.2026◆9.45प०मा०

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