सोमवार, 26 अक्टूबर 2026

भाव भूमि पर मैं खड़ा [ सजल ]

 368/2026


        

समांत           : आम

पदांत            :अपदांत

मात्राभार       : 24.

मात्रा पतन     : शून्य।


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


मातु शारदा को  करे,निशिदिन 'शुभम्' प्रणाम।

भाव भूमि  पर है  खड़ा, बना  काव्य सुखधाम।।


अक्षर-अक्षर   ब्रह्म  है,चुन -चुन  सुमन अनेक।

काव्य-मालिका   गूँथता, किंचित  नहीं  विराम।।


बिना   कृपा   माँ  भारती, शब्द  न आए एक।

हितकर  देश समाज  को,  लिखे  लेखनी थाम।।


सबका ही कल्याण हो,सब हों सुखी अशेष।

बरसें   मेघ  अनंत   से,सदा  न  आठों याम।।


करें   परस्पर   प्रीति   सब, रहे  न  कोई बैर।

सरिताएँ बहती रहें, कलरव   कर  प्रभु नाम।।


करें प्राप्त लंबी   अवधि,  जीवन   की नीरोग।

पर नेता  चूसें  नहीं,   समझ  मनुज को आम।।


'शुभम्' प्राप्त सौभाग्य का,कर उत्तम उपभोग।

रखे शुभद   उर   कामना, जपता राम  अकाम।।


शुभमस्तु,


26.10.2026◆5.30 आ०मा०

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