बुधवार, 14 जून 2023

ईश्वर से बचपन को तोला ● [ गीतिका ]

 254/2023


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●©शब्दकार

● डॉ०भगवत स्वरूप 'शुभम'

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जीवन की हर  बात निराली।

शुभता की सौगात  सँभाली।।


ईश्वर से   बचपन   को तोला,

पारदर्शिता   भोली  - भाली।


बचपन निकट सत्य के होता,

होती छलनी एक   न  जाली।


चिड़िया ज्यों सेती अंडों को,

 नाचें - कूदें    दे - दे    ताली।


क्षमादान  बालक   सौ  पाए,

 बुरा न मानें दें यदि    गाली।


बड़ा  हुआ   चालाकी  छाई,

जलता है  ज्यों जले पराली।


बचपन खेल - कूद में  जाए,

यौवन खड़ा  तान दोनाली।


बचपन कौन भूलता अपना,

रचना प्रभु ने अद्भुत ढाली।


बंद  हुए   सुख   के दरवाजे,

छलना की चल उठी पनाली।


'शुभम्' सत्य -पर्याय बालपन,

यौवन काम -  वासना थाली।


●शुभमस्तु !


12.06.2023◆ 5.45आ०मा०

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