बुधवार, 7 जून 2023

सच्चाई ही परिधान है ● [दोहा ]

 243/2023


[सच्चाई, परिधान ,बदनाम, आहत, यात्रा ]

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●शब्दकार ©

● डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम्'

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            ● सब में एक ●

सच्चाई से मोड़ मुख,मिले न मन को  धीर।

जिनके  उर निर्मल सदा,बनते भक्त कबीर।।

मिथ्या एक बचाव को,सौ-सौ मिथ्या  बोल।

छिपती सच्चाई नहीं,होती 'शुभम्'अमोल।।


हे नर!अपनी देह धर, बगुले-से  परिधान।

हंस  नहीं   होगा  कभी,झूठी तेरी   शान।।

चटक-मटक परिधान की,देगी तुझे न मान।

मँडराते  भौरें   सदा, करने को मधु - पान।।


बद अच्छा बदनाम से,कर ले मीत विचार।

लगी चरित पर कालिमा,धुले न बार हजार।।

कर्मों  से   ही  नाम  है, कर्मों से   बदनाम।

कर्म सदा शुभ कीजिए,बना देह को धाम।।


कर्म कभी हो भूल से,यदि निकृष्ट  हे  मीत।

पावन मन आहत रहे,गा न सके सद गीत।।

सत्कर्मों   से   मन  सदा,होता निर्मल  मीत।

आहत वह होता नहीं, चले न जो विपरीत।।


जीवन- यात्रा  में मिलें, छोटे  बड़े   पड़ाव।

चरैवेति  के  मंत्र  से,  चले पंथ भर   चाव।।

आते  पथ में मोड़ भी, यात्रा में  हर ओर।

जीवन सीधा पथ नहीं, मिलते कागा मोर।।

            

             ● एक में सब ●

सच्चाई     परिधान है, 

                        करे न नर बदनाम।

आहत मन करती नहीं,

                    यात्रा - पथ अविराम।।


●शुभमस्तु !


07.06.2023◆5.00आ०मा०


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