सोमवार, 2 अगस्त 2021

शिवार्चन 🪦 [गीत]


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✍️ शब्दकार ©

🪦 डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'

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हर, हर ,शंभु , महेश, पुरारी।

करें  वंदना   हम   त्रिपुरारी।।


अज,अंनत, शिव नाथ हमारे।

कृपा-करों से  किरण पसारे।।

विनय  सुनें   श्रीकंठ  हमारी।

हर,हर ,शंभु,   महेश  पुरारी।।


तुम सर्वज्ञ,भव,अनघ अनीश्वर

शर्व, कपर्दी,  भीम , महेश्वर।।

हरें   पिनाकी   विपदा  सारी।

हर ,हर, शंभु, महेश,  पुरारी।।


सोम, सदाशिव,भर्ग, जटाधर।

अव्यय,तारक,हे करुणाकर।।

सहस्रपाद हम शरण तुम्हारी।

हर, हर, शंभु, महेश, पुरारी।।


उग्र ,  त्र्यम्बक,  हे  मृत्युंजय।

अज शाश्वत कवची हे स्वरमय।

महादेव ,     अघ     संकटहारी।

हर, हर , शंभु, महेश, पुरारी।।


गिरिधन्वा, कामारि, यज्ञमय।

वीरभद्र,हवि,हरें  जगत भय।।

शूलपाणि, शंकर ,  भयहारी।

हर,हर ,शंभु ,महेश,  पुरारी।।


सुरसूदन,  अव्यक्त ,दिगम्बर।

त्रिलोकेश ,स्वामी, विश्वेश्वर।।

सुखी  रहें जग के नर - नारी।

हर,हर,शंभु ,महेश , पुरारी।।


जगतव्याप्त,गुरु जगत, नियंता।

वंदन  करें  भक्त   जन  संता।। 

'शुभम' तुम्हें भजता शुभकारी।

हर, हर, शंभु,  महेश, पुरारी।।


🪴 शुभमस्तु !


०२.०८.२०२१◆१.१५ पतन म  मार्तण्डस्य।

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