208/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
-1-
अरे मन नेंक नहीं पछितायौ।
राम नाम की पीत चदरिया ओढ़ि अजुध्या धायौ।
मिलौ नोट गिनिवे को मौकौ देखि- देखि ललचायौ।।
गिनतौ लाख करोड़ों निशिदिन काम बहुत ही भायौ।
सोना - चाँदी चढ़े अनेकों लार मुखनि भरि आयौ।।
बढ़तौ रहौ लोभ मुख टपकौ साहस खूब जुटायौ।
एक दिना रखि हरे नोट की गड्डी घर कूं लायौ।।
रोक न टोक मिली काहू की नित कौ नियम बनायौ।
'शुभम्' पतित है गयौ गणक मैं अपनो भवन बनायौ।
-2-
जाँच भई मन बहुत डरानौ।
काँपि रहौ मन भीतर-भीतर अब तौ पड़े निभानौ।
कछु ऐसी तरकीब बताऔ हे प्रभु राम जु जानौ।।
राज्य प्रमुख योगी जी अपने बुलडोजर चलवाते।
बड़े सख्त हैं अनुशासन के भवन बने गिरवाते।।
बचे न डाकू चोर एक भी सबकी हालत पतली।
नाम सुनें जब-जब अपचारी तन में आवै मितली।।
कैसे करें प्राण कत बचिहें गाइ राम कौ गानौ।
'शुभम्' झूठ ही एक सहारौ मान सकें तौ मानौ।।
-3-
राम दान की हुई सफाई।
टूट गए विश्वास सभी के डरते लोग -लुगाई।
लाखों नहीं करोड़ों लूटे पड़ता कान सुनाई।।
शक की सूई कहाँ रुकेगी कौन आज यह जाने।
राजनीति है रही देश में गिरते चारों खाने।।
जितने मुँह उतनी ही बातें कहें वही जो भावै।
बिना करे की मिलै सेंत में कौन नहीं ललचावै।।
बचें प्राण कैसे अब अपने हमें बताओ भाई।
'शुभम्' शेर योगी को गरजै बचें न ताऊ ताई।।
-4-
राम दान कित जाइ सिधारौ।
हलचल मची देश भारत में पड़ौ बहुत ही भारौ।
भयौ कपूर उड़ो अंबर में बिना लगाए नारौ।।
पकड़ौ जाइ चोर जा दिन कूँ पकड़ि पीठ पै मारौ।।
जाँच करें जितने अधिकारी सब इनाम पा जाएँ।
टीवी वारे और मीडिया सिगरे रार मचाएं।।
लूटि रहे हैं मजा विरोधी दिखे दाल में कारौ।
'शुभम्' लगे उनको सत्तासन आज अभी से हारौ।।
-5-
दाढ़ीजार कहाँ ते आए।
राम नाम कूँ खूब भुनायौ राम दाम ललचाए।
पहनि पीत अंबर तन ऊपर भक्तन कूँ भरमाए।।
कहते अपनी करी कमाई अपने महल बनाए।
नंगे नहीं फ़क़ीर सहस चौदह में साज सजाए।।
गोबर में दस लाख मिले तो नेंक नहीं शरमाए।
गहने बेचि ईंट बनवाईं लूटि-लूटि धन खाए।।
कहते राम कृपा है हम पर जो हम शृंग चढ़ाए।
'शुभम्' पाप के घड़े भरे अब तबहुँ नहीं पछताए।।
शुभमस्तु,
22.06.2026◆ 4.45 प०मा०
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