बुधवार, 24 जून 2026

सोने के जब अंडे पाए [ पद ]

 209/2026


    


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


                         -1-

राम राशि अपने घर लायौ।

सीता - हरण  करौ  रावण ने नहीं नेंक शरमायौ।

बात   पुरानी  त्रेता युग की अपनों जोर चलायौ।।

चढ़ौ  चढ़ावौ रामलला पै भौत-भौत मन भायौ।

गिनती में करि गड़बड़ सारी अपनी जेब भरायौ।।

कलयुग  की   ये बात नई है बड़ौ - बड़ौ इतरायौ।

बीवी   कहै   सफाई   देती  पति ने सभी कमायौ।।

होटल   भवन  दुकानें सिगरी अपने धन बनवायौ।

'शुभम्' कमाई चोरी करके मुख अपनौ चमकायौ।।


                         -2-

बगुला भगत देह के गोरे।

मर्यादा    पुरुषोत्तम    छोड़े   बने भए अति भोरे।

मर्यादा   अपनी   तजि   सारी  नोट चुराए   कोरे।।

पाँव  तले    भगवान  राम  के  सोना चाँदी   जोरे।

याद न रहौ कर्म फल पल को मन में लेत हिलोरे।।

सात   नहीं   सत्तर  पीढ़ी  को  हार खड़ाऊँ  चोरे।

बने   राम   के  कुशल प्रशासक भरे नोट के   बोरे।

'शुभम्' पाप कौ फूटि घड़ा गयौ गिरे शीश पै ओरे।।


                         -3-

राजनीति मंदिर पर भारी।

नातेदार   जाति   वारे भरि करें प्रशासक   यारी।

सत्रह-सत्रह साल एक ही गणक बनों अपचारी।।

जड़ें जमी भ्रष्टाचारी  की खेलि गयौ निज   पारी।

कोई कहै  बकै   कछु  कैसौ ऐसी लीक   बिगारी।।

दर्शक आए गए भेंट  करि  बाल  वृद्ध नर-नारी।

नाश करौ श्रद्धा कौ सिगरौ भई न चोरनु ख़्वारी।।

राम   कहाँ   बैठे   बनि  दर्शक   मूक चुराई   जारी।

'शुभम्' भेद जब खुलौ पाप कौ भांजि रहे तलवारी।।


                         -4-

सोने के जब अंडे  पाए।

दोनों    हाथ   फोड़ते   लड्डू   शीश कढ़ाई  धाए।

खांड़ खूँदते   जब  पावों से क्यों न प्रेम से  खाए।।

मूढ़   बने   वे   भक्त  राम   के सोना चाँदी  लाए।

बैठे     चोर  लुटेरे     डाकू    सोच-सोच पछताए।।

पीला पहन   दुपट्टा   धोती  भजन राम के     गाए।

चढ़ा प्रसाद नोट गहनों का किसको नहीं रिझाए।।

कृपा   करी   भगवान  राम ने  मंदिर माँहि   बिठाए।

'शुभम्' सफल जीवन चोरनु कौ दान लूटि घर धाए।।


                         -5-

राम राशि की लूट मचाई।

छिपौ भयौ तिनकौ दाढ़ी में नेंक न देत दिखाई।

कहा   जाँच   में करें जचैया उनकी हाथ सफाई।।

साँप   भगे    मोरी   ते बाहर   करते रहो खुदाई।

पीटो   जितनी   आप  लकीरें मिलनी नहीं सचाई।।

इधर   उधर    नेता नगरी   है ऊपर करें   खिंचाई।

साँप    मरै    टूटै  जनि   लाठी ऐसी राम   दुहाई।।

करें राम जी   चमत्कार  कछु मिलिहै दान चुराई।

'शुभम्' सोच मन में कछु ऐसौ दिखे राम प्रभुताई।।


शुभमस्तु,


23.06.2026◆9.15 आ०मा०

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