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राम-दाम की लूट बड़ी ये
[ चौपाई ]
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
राम - नाम की लूट नहीं ये।
राम- दाम की लूट बड़ी ये।।
समाचार टीवी पर आए।
किसने सोना नोट चुराए।।
भरे पड़े अखबार हमारे।
दान पात्र लुट गए बिचारे।।
चोर कौन बाहर से आया।
दान मिला जो लिया चुराया।।
राज्य प्रमुख ने जाँच बिठाई।
किसने की है चौर्य ढिठाई।।
गणकों पर सारा शक जाता।
हाथ नहीं कोई भी आता।।
खंगाले हैं सीसीटीवी।
मना कर रही गणकी बीवी।।
कर दी किसने हाथ सफाई।
खूँद खांड खा रहा मिठाई।।
बचे न चोर राम-अपराधी।
जिसने चौर्य - साधना साधी।।
बड़ा जाँच का मोटा डंडा।
नाचे नाच मौन मुस्टंडा।।
कब तक चंपत होगा कोई।
नहीं दूध में चादर धोई।।
घड़ा भर गया अब तो भाई।
बचे न दोषी लोग-लुगाई।।
टुन्ना मुन्ना धन्ना जो भी।
कट जाएगा जैसे गोभी।।
उच्च अयोध्या धाम हमारा।
केंद्र आस्था का अति प्यारा।।
शुभमस्तु,
21.06.2026◆2.00 प०मा०
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