204/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
हीरा -मोती
सोना -चाँदी
कागाओं के भोग बने।
रामचन्द्र
कह गए सिया से
ऐसा कलयुग आएगा
चोरी नहीं
पड़ेगा डाका
कौवा मोती खायेगा
दान चुराएँगे
जो भारी
अकड़ दिखाएं खड़े तने ।
कर्ता धर्ता
नोट गिनैया
चोर नहीं डाकू सारे
राम मौन
सब देख रहे थे
खेल करें सब बजमारे
डाकू नहीं कहेगा
मैंने
किए सकल अपराध घने।
जिसकी पूँछ उठी
वह निकला
डाकू बड़ा ढीठ पाजी
बना लिए
निज महल अटारी
हार गए प्रभु जी बाजी
काम न आया
बजरंगी का
दाँव कड़े हैं कनक चने।
राम राज की
परिभाषा को
अंगीकार किया जिसने
छोड़ा नहीं
सुबूत एक भी
दान हरण करता उसने
तान मूँछ को
घूम रहे हैं
डाकू सारे बने ठने।
कितना दण्ड
मिलेगा इनको
सौ-सौ जन्म चुकाएंगे
कलयुग के कूकर
कब तक यों
बचकर बाहर जाएँगे
नख से शिख तक
राम-रक्त से
सारे खटमल आज सने।
शुभमस्तु,
22.06.2026◆5.45 आ०
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