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©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
जलजीवालय मछली वाला।
लगता मुझको बड़ा निराला।।
उसमें रंग-बिरंगी मछली।
तैर रही हैं सब हैं असली।।
करते बिजली-बल्ब उजाला।
जलजीवालय मछली वाला।।
बना-बनाया भोजन पातीं।
खूब तैरतीं वे उतरातीं।।
दाना रंग-बिरंगा काला।
जलजीवालय मछली वाला।।
छोटी-सी है उनकी दुनिया।
प्राण वायु करती छुनछुनिया।।
फिल्टर में स्पंजी जाला।
जलजीवालय मछली वाला।।
देख मछलियाँ हम खुश होते।
हँसने लगते बालक रोते।।
हरा पेड़ पापा ने डाला।
जलजीवालय मछली वाला।।
बना काँच का सजल सरोवर।
मछली तैर रहीं हैं छर-छर।।
'शुभम्' शीत में हीट -दुशाला।
जलजीवालय मछली वाला।।
शुभमस्तु,
14.06.2026◆4.30 प०मा०
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