मंगलवार, 30 जून 2026

सुखधाम घर अपना [ गीत ]

 221/2026


     


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


परिवार हो खुशहाल

छोटा

सुखधाम घर अपना।


बहुत की

इच्छा नहीं

संतोष मिल जाए

जिंदगी 

सुख शांति से

कट भीम -सी जाए

देखें वही

जो हो सके

परिपूर्ण हर सपना।


 मन भाव

औरों के लिए

कुत्सित न हों गदले

नेह बाँटें

नेह पाएँ

नेह से उजले

जिंदगी है साधना

ताजिंदगी तपना।


आदमी के

काम आए 

आदमी दिन-रात

सोचे नहीं

उसको मिले

हमसे कभी भी मात

माला जपे

प्रभु राम की

धन-धाम क्या जपना।


एक दम्पति

पुत्र-पुत्री

प्रेम से रहते

आपसी 

हर बात को वे

गेह में   कहते

यों तो

सभी को रात -दिन

हर हाल में खपना।


चालबाजी में 

नहीं

छल छद्म की फँसना

आ जाए

कोई आपदा

फिर भी सदा हँसना

ममता मदद

करुणा भरे

दीपक सदा जलना।


शुभमस्तु,


30.06.2026◆8.30 आ०मा०

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