221/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
परिवार हो खुशहाल
छोटा
सुखधाम घर अपना।
बहुत की
इच्छा नहीं
संतोष मिल जाए
जिंदगी
सुख शांति से
कट भीम -सी जाए
देखें वही
जो हो सके
परिपूर्ण हर सपना।
मन भाव
औरों के लिए
कुत्सित न हों गदले
नेह बाँटें
नेह पाएँ
नेह से उजले
जिंदगी है साधना
ताजिंदगी तपना।
आदमी के
काम आए
आदमी दिन-रात
सोचे नहीं
उसको मिले
हमसे कभी भी मात
माला जपे
प्रभु राम की
धन-धाम क्या जपना।
एक दम्पति
पुत्र-पुत्री
प्रेम से रहते
आपसी
हर बात को वे
गेह में कहते
यों तो
सभी को रात -दिन
हर हाल में खपना।
चालबाजी में
नहीं
छल छद्म की फँसना
आ जाए
कोई आपदा
फिर भी सदा हँसना
ममता मदद
करुणा भरे
दीपक सदा जलना।
शुभमस्तु,
30.06.2026◆8.30 आ०मा०
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