मंगलवार, 23 जून 2026

राम-दान की लूट सुनी है [ बालगीत ]

 198/2026




©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


राम-दान     की   लूट    सुनी    है।

मंदिर   में    एक    छूनछुनी    है।।


सुना    चोर     बाहर    से    आया।

कोई      नहीं      देखने      पाया।।

गणकों    के     मन  धुनाधुनी    है।

राम-दान    की    लूट   सुनी    है।।


नहीं  समझ   पाए     कुछ  जाँची।

दान -चोर की       घटना    साँची।।

सीसी टीवी       शीश    धुनी    है।

राम-दान    की    लूट    सुनी   है।।


सोना     गया         पादुका चोरी।

गए    हार    कंगन   किस  मोरी।।

डाके की    क्या   राह   चुनी   है ?

राम-दान    की    लूट    सुनी   है।।


गिनती   कर्ता      बैंक      रखैया।

चोर     कहाँ    के   बोलो   भैया??

किसी   करू   ने   राह    बुनी   है।

राम-दान    की    लूट     सुनी   है।।


भवन    करोड़ों      के     बनवाए।

कहता     मैंने     स्वयं      सजाए।।

चालबाज  लग    रहा    गुनी    है।

राम-दान    की    लूट    सुनी    है।।


करामात       हाथों      की    ऐसी।

करे     धर्म     की       ऐसी-तैसी।।

मंदिर   में      ही     नागफ़नी    है।

राम-दान     की     लूट    सुनी है।।


शुभमस्तु,

21.06.2026◆11.30 आ०मा०

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