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©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
राम-दान की लूट सुनी है।
मंदिर में एक छूनछुनी है।।
सुना चोर बाहर से आया।
कोई नहीं देखने पाया।।
गणकों के मन धुनाधुनी है।
राम-दान की लूट सुनी है।।
नहीं समझ पाए कुछ जाँची।
दान -चोर की घटना साँची।।
सीसी टीवी शीश धुनी है।
राम-दान की लूट सुनी है।।
सोना गया पादुका चोरी।
गए हार कंगन किस मोरी।।
डाके की क्या राह चुनी है ?
राम-दान की लूट सुनी है।।
गिनती कर्ता बैंक रखैया।
चोर कहाँ के बोलो भैया??
किसी करू ने राह बुनी है।
राम-दान की लूट सुनी है।।
भवन करोड़ों के बनवाए।
कहता मैंने स्वयं सजाए।।
चालबाज लग रहा गुनी है।
राम-दान की लूट सुनी है।।
करामात हाथों की ऐसी।
करे धर्म की ऐसी-तैसी।।
मंदिर में ही नागफ़नी है।
राम-दान की लूट सुनी है।।
शुभमस्तु,
21.06.2026◆11.30 आ०मा०
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