197/2026
© शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
साझा न किया राम-नाम
राम-दान लूट लिया
धर्म को झूठ किया
सुबह न देखी शाम
बचा नहीं ऐहतराम !
रक्षक बने भक्षक सभी
राम-दाम के तक्षक सभी
पूँछ तो उठेगी ही
साँच को उगलेगी ही
इंतज़ार करें अभी।
सोने की पादुकाएं
हीरा जटित स्वर्णहार
नोटों के बड़े ढेर
मच गया अंधेर
धर्म पर ओछा प्रहार।
ये चोर नहीं बाहर के
आज भी हैं अंदर ये
पड़नी है कड़ी मार
निकल पड़ेगा स्वर्णहार
दुनिया कहे छि:! छि:!! छि:!!!
नहीं पड़ी लेश भनक
करते रहे जो गणक
हुई नहीं किंचित खनक
धरी रह गई हनक
आ रही है बू ही बू !
एस आई टी का सोटा
समझें नहीं उसे छोटा
दान-दाम चोर कौन
अभी सभी चोर मौन
वक्त का मात्र टोटा
कौन सही कौन खोटा?
शुभमस्तु,
21.06.2026◆ 10.30 आ०मा०
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