216/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
दूध-दूध अलग-अलग पानी-पानी अलग-अलग।
लूट-लूट अलग-अलग राम-कहानी अलग-अलग।।
धुँआँ उठा आग जली लपटों में जल उठा देश,
जितने मुँह उतनी बात मुख बयानी अलग-अलग।
चोर कहे मैं चोर नहीं शेष सब राम जाने,
राम की कृपा है सब कहता लुभानी अलग -अलग।
राम-दान-दाम गया भवन बने हैं नए-नए,
पितांबर ओढ़ नव्य नैया डुबानी अलग -अलग।
दूध का धुला न एक दाल सभी काली-काली,
झूठी सब बीबियाँ बतियाँ बनानी अलग-अलग।
पाप-पुण्य धर्म नहीं बोध अपराध नहीं,
दुनिया की फ़िक्र नहीं फसलें उगानी अलग-अलग।
'शुभम्' राम मंदिर है कमाने का स्रोत एक,
पल रहे डाकू चोर दुनिया दिवानी अलग -अलग।
शुभमस्तु,
28.06.2026◆10.30 आ०मा०
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