सोमवार, 29 जून 2026

दूध-दूध अलग-अलग [गीतिका ]

 216/2026


         


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


दूध-दूध अलग-अलग पानी-पानी अलग-अलग।

लूट-लूट अलग-अलग राम-कहानी अलग-अलग।।


धुँआँ   उठा  आग  जली  लपटों में जल उठा देश,

जितने मुँह उतनी बात मुख बयानी अलग-अलग।


चोर   कहे  मैं   चोर  नहीं  शेष   सब  राम   जाने,

राम की कृपा है सब कहता लुभानी अलग -अलग।


राम-दान-दाम    गया   भवन   बने   हैं नए-नए,

पितांबर ओढ़ नव्य  नैया  डुबानी अलग -अलग।


दूध का   धुला  न  एक दाल सभी काली-काली,

झूठी सब बीबियाँ बतियाँ बनानी  अलग-अलग।


पाप-पुण्य       धर्म   नहीं   बोध   अपराध   नहीं,

दुनिया की फ़िक्र नहीं फसलें उगानी अलग-अलग।


'शुभम्'   राम   मंदिर   है  कमाने का स्रोत   एक,

पल रहे डाकू चोर दुनिया दिवानी अलग -अलग।


शुभमस्तु,


28.06.2026◆10.30 आ०मा०

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