सोमवार, 3 अगस्त 2020

मोटू हलवाई [ बालगीत ]

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© शब्दकार©
🧆 डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'
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देखो  ये      मोटू    हलवाई।
रोज  बनाता  खूब   मिठाई।।

लड्डू     पेड़ा    खाते वरती।
बने   जलेबी  और   इमरती।।
घेवर ,  रबड़ी  ,    बालूशाही।
देखो   ये    मोटू     हलवाई।।

गरम समोसा   नरम पकौड़ी।
दाल मूँग की प्याज  मगौड़ी।।
खाते      पापा    मम्मी  ताई।
देखो  ये     मोटू     हलवाई।।

बची -  खुची हलवाई  खाता।
पेट  लटक   बाहर को आता।।
करता  दिनभर  खूब कमाई।
देखो  ये    मोटू     हलवाई।।

मीठा  थोड़ा    मुझे  न भाता।
नमक मिर्च का ही मैं खाता।।
काजू की   बर्फी   बस  भाई।
देखो     ये   मोटू    हलवाई।।

बहन-नेह का शुभ दिन आया
राखी  का  ये   पर्व  सुहाया।।
घेवर   की  छोड़ूँ   न मिठाई।
देखो     ये    मोटू   हलवाई।।

💐 शुभमस्तु !

03.08.2020 ◆9.25पूर्वाह्न।

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