गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026

करवा चौथ [ रोला ]

 375/ 2026


             


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


                         -1-

मनती करवा चौथ, देश   में   भाभी ताई।

पत्नी साली आज,कर रहीं साफ़- सफ़ाई।।

घर-घर में  उल्लास,छा रहा अनुपम ऐसा।

सोने की   बरसात,हो  रही है  कुछ  वैसा।।


                           -2-

हाथ -पाँव  में  लेप, हिना की लिपि मनहारी।

बिसर   गईं  तन   पीर, मिटीं  सारी बीमारी।।

बढ़े  आयु की   बेल, जिए पति सौ-सौ बरसों।

करवा चौथ न भूल, बो  रही  प्रेमिल सरसों।।



                            -3-

सजा  रहीं   निज देह,करें   शृंगार  सजीले।

करवा चौथ महान,  अंग   हैं   बने छबीले।।

नारी   पर्व    अनूप, देश    में   हिन्दू   नारी।

मना रहीं  सह प्रेम, रहें पति सदा सुखारी।।


                         -4-

भारत   देश   महान, प्रथाएँ   यहाँ  हजारों।

मना रहे नर-नारि, गेह सब  सड़क बजारों।।

उनमें   करवा चौथ, एक   है   पर्व निराला।

पियें न दिन भर नीर, नारियाँ भखें निवाला।।


                         -5-

आई    करवा   चौथ,   मनाती    हिंदू  नारी।

स्वच्छ करें   घर -द्वार,  करें   भरसक तैयारी।।

तन-मन   सजा अनूप,  षोडसी-सी    वे झूमें।

नई     शाटिका   धार,   परी-सी    अंबर चूमें।।


शुभमस्तु,

29.10.2026◆8.00 आ०मा०

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