शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

छलनी लगाकर रूप का [ नवगीत ]

 379/2026


     


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


छलनी लगाकर

रूप का

इज़हार करवा चौथ है।


बूँद भी पानी नहीं

मुख में पड़ा

उपवास है

आयु प्रीतम की बढ़े

यह बात

कितनी खास है

जो ड्रमों में

पैक कर दें

उपसंहार करवा चौथ है।


सावित्रियाँ  

इस देश की

पति को बचातीं काल से

साक्षात मौतें

छत तले

कुछ हैं खड़ीं करवाल ले

मिट रहे आदर्श 

सारे

अब छार करवा चौथ है।


सद्भवना का रंग

काला

संदिग्ध लगता है

आदमी का रूप

रंजित

गिद्ध लगता है

एक दिन की 

चाँदनी 

अनुदार करवा चौथ है।


औपचारिकता 

निभाती

आज ये दुनिया

हर आदमी 

घर में विकल 

निज नारि से दुखिया

है विलासी 

जिंदगी ये

अख़बार करवा चौथ है।


शुभमस्तु,


29.10.2026◆ 8.15 प०मा०

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