शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

सब अपनी-अपनी बात करें [नवगीत ]

 380/2026


   

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


दुख - दर्द 

मुझे भी होता है

सब अपनी-अपनी बात करें।


जब हूक उठी

मेरे दिल में

मैं सुबक-सुबक कर रोया हूँ

क्या पता किसी को

रात -रात

मैं नहीं एक पल सोया हूँ

किस किसने

 पौंछे अश्रु मेरे

सब अपनी-अपनी बात करें।


चाहते सभी

कोई आए

आकर रुमाल से पौंछ नयन

ढाढ़स दे

मुझे सांत्वना दे

कुछ करे प्यार से भिगो वचन

जब टूटा था 

पहाड़ मुझ पर

सब अपनी-अपनी बात करें।


खुदगर्ज यहाँ के

लोग बड़े

जब सोचा तो अपना सोचा

अनभिज्ञ रहे

मेरे दुख से

दे गए वक्त पर वे लोचा

फिर भी मैं

भला चाहता हूँ

सब अपनी -अपनी बात करें।


हैं बड़े बहाने

बचने के

पर चोरी पकड़ी जाती है

जब गिरे नहीं

दो अश्रु बिंदु

हृद-कली कहाँ मुस्काती है

आँखें क्यों

उनकी आज झुकीं

सब अपनी -अपनी बात करें।


शुभमस्तु,


30.10.2026◆10.15 आ०मा०

                ◆●◆

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