शनिवार, 31 जनवरी 2026

बचपन मेरे अभी न जाओ [ बालगीत ]

 053/2026



©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


बचपन   मेरे  अभी    न  जाओ।

कुछ  दिन  मेरे  साथ   बिताओ।।


पुनः  नहीं       आवर्तन      होना।

मुझे    पड़ेगा     तुमको    खोना।। 

 आओ  सँग-सँग   खेलो    खाओ।

बचपन   मेरे   अभी   न    जाओ।।


कंचे      और     कबड्डी     खेलें।

चलो  उधर    हम   दंडें     पेलें।।

अपनी   धूनी    यहीं      रमाओ।

बचपन  मेरे  अभी  न    जाओ।।


वर्षा  हुई      भींग     लें   थोड़ा।

मस्त  घूम    लें     मोड़ी -मोड़ा।।

दूर  नहीं  तुम    हमसे    आओ।

बचपन  मेरे  अभी  न   जाओ।।


कागज   की हम    नाव   चलाएं।

जुगनू  पकड़ें    उन्हें     खिलाएं।।

छोड़  गज़ब हम   पर  मत ढाओ।

बचपन  मेरे   अभी    न   जाओ।।


बड़े  नहीं      है   हमको     होना।

नहीं   चाहते     तुमको     खोना।।

झंडा  ऊँचा    मिलकर      गाओ।

बचपन  मेरे   अभी   न    जाओ।।


शुभमस्तु ,


27.01.2026◆11.15 आ०मा०

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