053/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
बचपन मेरे अभी न जाओ।
कुछ दिन मेरे साथ बिताओ।।
पुनः नहीं आवर्तन होना।
मुझे पड़ेगा तुमको खोना।।
आओ सँग-सँग खेलो खाओ।
बचपन मेरे अभी न जाओ।।
कंचे और कबड्डी खेलें।
चलो उधर हम दंडें पेलें।।
अपनी धूनी यहीं रमाओ।
बचपन मेरे अभी न जाओ।।
वर्षा हुई भींग लें थोड़ा।
मस्त घूम लें मोड़ी -मोड़ा।।
दूर नहीं तुम हमसे आओ।
बचपन मेरे अभी न जाओ।।
कागज की हम नाव चलाएं।
जुगनू पकड़ें उन्हें खिलाएं।।
छोड़ गज़ब हम पर मत ढाओ।
बचपन मेरे अभी न जाओ।।
बड़े नहीं है हमको होना।
नहीं चाहते तुमको खोना।।
झंडा ऊँचा मिलकर गाओ।
बचपन मेरे अभी न जाओ।।
शुभमस्तु ,
27.01.2026◆11.15 आ०मा०
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