056/2026
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
अपना उल्लू
सीधा करने के लिए
कुछ उल्लुओं को
लड़वाना भी
एक हुनर है,
राजनीति है,
यह बात
सभी नहीं जानते
दूरदर्शिता की बात है।
कभी-कभी गलतियाँ
होतीं नहीं
की जाती हैं,
सबके दिमाग में
यह बात नहीं आती
ये वही समझते हैं
जो खुराफ़ाती हैं।
जमालो आग लगाकर
दूर खड़ी
तमाशा देखती है,
जलती हुई आग पर
अपने हाथ सेंकती है,
इसे मूर्ख कैसे समझें !
सियासत सबके
वश की बात नहीं मित्रो!
खुराफातियों को
देश में शांति नहीं भाती,
उठती हुई
आग की लपटें ही
उन्हें खूब ही सुहाती ,
नए के नाम पर
कुछ ऐसा करवा देना है
जिसे निज हित में
अपने अंडे ही सेना है,
समझदार के लिए
इशारा ही
बहुत होता है,
मालिक लिए है
हाथ में बड़ा-सा डंडा
भारी भरकम बोझ तो
ढोता ही सदा खोता है।
शुभमस्तु ,
29.01.2026◆ 8.15 प०मा०
◆◆◆
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें