बुधवार, 31 दिसंबर 2025

चौदहवीं के चाँद-सी [ दोहा ]

 794/2025


       

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


चौदहवीं   के   चाँद-सी, चौदह कृतियाँ  देख।

'शुभम्'  हृदय हर्षित बड़ा,काव्य रूप संलेख।।

'शुभम्  शब्दरस'  रंजनी ,'शुभम् सवैया' ग्रंथ।

कुंडलिया  के  कुंज   में, नवगीतों   का पंथ।।


रोचक   'दोहा   भारती' ,  संग 'गीतिकानंद'। 

बालगीत     रचनावली,  गाती   गीत अमंद।।

'शुभम्' कहे साँची सदा,व्यंग्य चलाकर तेज।

पर  मुझको  रुकना नहीं,बिछा गुदगुदी सेज।।


शहर गया जब गाँव को, चहका 'श्वान पुराण'।

लोकतंत्र   झुरमुट  छिपा,बचा स्वयं के प्राण।।

'सभी  सुखी हों' कामना,करता कवि अतुकांत।

'सर्वे भवंतु सुखिनः'   कहे,  धरे हृदय  में शांत।।


दोहा     कुंडलिया  सजी,चमके  व्यंग्य सुधार।

काव्य लिखे  अतुकांत  भी, उर में भाव उदार।।

श्वान  व्यथाएँ  जानकर, कवि उर गया पसीज।

गीत   लिखे  नवगीत  भी,देखी  चौथ न तीज।।


चौपाई     की    चाँदनी,  बालपने   के  गीत।

पढ़ -पढ़ बालक  गा   रहे,बने  काव्य के मीत।।

बहुल विधा वाणी सजी, माँ का कृपा विधान।

वरना क्या  सामर्थ्य थी, 'शुभम्'  करे गुणगान।।


दो   हजार  पच्चीस का,शुभ दिन है बुधवार।

कल   होगा  छब्बीस  का,गुरुवर का उपहार।।


शुभमस्तु !


31.12.2025● 10.15आ०मा०

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