367/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
जान गए तो
राजनीति क्या ?
जो कर ले
वह राजा।
नहीं आम का काम
खास ये
जो चुसता वह आम,
चूषण में जो
जितना भूषण
वही राज का राज।
राजनीति चुसने में ?
बिलकुल नहीं
नहीं जी, नहीं- नहीं,
सदा चूसना
राजनीति है
यत्र तत्र सर्वत्र कहीं।
जितना बड़ा
चूसने वाला
उतना ही वह
सुसफ़ल नेता,
अभिनेता तो
नाटक करता
असली तो बस
नेता होता।
सबके वश का
काम नहीं है
पहले तो
मन गदला कर लो,
चले अगर तो
राज -मार्ग पर
राजनीति कुर्ते में
भर लो।
राजफ़ाश
जब हो जाए तो
समय पूर्व
क्या राजनीति है?
मटकी में
गुड़ फोड़ा जाए
कहते हैं जन
कूटनीति है।
जन के ऊपर
कहलाता है
दबा रखे जो
जन का नेता,
राजनीति का
मुकुट वही है
नहीं कभी
धेला भर देता।
चढ़ी पेट पर
सदा दबाती
जन- जन को
यह राजनीति ही,
बचना है
आसान न इससे
रीति पुरानी
बिना प्रीति की।
शुभमस्तु !
24.07.2025●7.00आ०मा०
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