357/2025
समांत :अटा
पदांत : है
मात्राभार : 16.
मात्रा पतन : शून्य
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
सावन आया सघन घटा है।
सजल मेघ की रम्य छटा है।।
इतना जल बरसा झर- झर- झर।
जल- थल का संबंध कटा है।।
इंद्रधनुष ने रंग बिखेरे।
किंचित घन का गात फटा है।।
पर्वत पर शिव शंभु खड़े हैं।
बिखरी भू तक श्याम जटा है।।
खेत बाग वन हरे -भरे सब।
परिश्रम को जा कृषक खटा है।।
सरिताओं ने कल- कल - कल का।
निशा- दिवस निज पाठ रटा है।।
वन में गए भ्रमण करने हम।
खोद - खोद कर प्राप्त गटा है।।
'शुभम् ' देख लो अस्ताचल में।
अंबर से कुछ मेघ हटा है।।
शुभमस्तु !
20.07.2025●10.45 प०मा० (रात्रि)
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