मंगलवार, 22 जुलाई 2025

सजल मेघ की छटा [सजल]

 357/2025



      

समांत        :अटा

पदांत         :  है

मात्राभार    :  16.

मात्रा पतन  : शून्य


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


सावन    आया      सघन   घटा   है।

सजल  मेघ   की    रम्य   छटा  है।।


इतना  जल   बरसा झर- झर- झर।

जल- थल  का   संबंध    कटा  है।।


इंद्रधनुष        ने       रंग      बिखेरे।

किंचित   घन   का   गात फटा  है।।


पर्वत  पर    शिव    शंभु    खड़े  हैं।

बिखरी  भू   तक   श्याम   जटा है।।


खेत   बाग   वन     हरे -भरे   सब।

परिश्रम  को  जा   कृषक खटा है।।


सरिताओं ने  कल- कल - कल का।

निशा- दिवस निज  पाठ   रटा  है।।


वन  में   गए   भ्रमण   करने    हम।

खोद - खोद   कर   प्राप्त   गटा है।।


'शुभम् '  देख    लो   अस्ताचल  में।

अंबर    से   कुछ   मेघ   हटा    है।।


शुभमस्तु !


20.07.2025●10.45 प०मा० (रात्रि)

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