366/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
कंकरीट के जंगल उगते
कहाँ गई हरियाली।
फूल - पत्तियाँ रंग- बिरंगे
प्लास्टिक के छतनार
घर की बढ़ा रहे हैं शोभा
चारु चँदोवा चार
दृष्टि जिधर भी जाती अपनी
दिखती एक न डाली।
दुर्घटना में मरे आदमी
कोई पास न आता
खड़ा-खड़ा कुछ ही दूरी पर
लाइव चित्र सजाता
नहीं चिकित्सा करवाता वह
खबर करे कुतवाली।
नीम छाँव अमराई पीपल
नहीं पास में एक
पाँच मिनट को जाए बिजली
खोए मनुज विवेक
बिजलीं वालों को साला कह
करे सुशोभित गाली।
शुभमस्तु !
23.07.2025 ●3.15 आ०मा०
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