मंगलवार, 22 जुलाई 2025

सावन आया [ गीतिका ]

 358/2025


       

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


सावन    आया      सघन   घटा   है।

सजल  मेघ   की    रम्य   छटा  है।।


इतना  जल   बरसा झर- झर- झर,

जल- थल  का   संबंध    कटा  है।


इंद्रधनुष        ने       रंग      बिखेरे,

किंचित   घन   का   गात फटा  है।


पर्वत  पर    शिव    शंभु    खड़े  हैं,

बिखरी  भू   तक   श्याम   जटा है।


खेत   बाग   वन     हरे -भरे   सब,

परिश्रम  को  जा   कृषक खटा है।


सरिताओं ने  कल- कल - कल का,

निशा- दिवस निज  पाठ   रटा  है।


वन  में   गए   भ्रमण   करने    हम,

खोद - खोद   कर   प्राप्त   गटा है।


'शुभम् '  देख    लो   अस्ताचल  में,

अंबर    से   कुछ   मेघ   हटा    है।


शुभमस्तु !


20.07.2025●10.45 प०मा० (रात्रि)

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