बुधवार, 15 अक्टूबर 2025

शैतानों से होड़ लगी है [ नवगीत ]

 618/2025




©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


शैतानों से

होड़ लगी है

तुम आगे पीछे शैतान।


जलदी-जलदी

सब निपटा लो

निकले   नहीं  वक्त की रेल

समय पूर्व

झटपट कर डालो

खेल अनैतिक कितने खेल

सत को रखा

ताक के ऊपर

बना हुआ मानव हैवान।


फिल्मों के

अभिनीत नचनिये

अब आदर्श तुम्हारे सारे

राम कृष्ण को

नहीं जानते

युवती-युवा आज बजमारे

रामायण या

विदुरनीति  के

पाठ हुए थोथे बेजान।


ब्याह रचा

नववधू विराजी

निजता की रखवाली में

सास-ससुर

वृद्धाश्रम भेजे

लगन लगाई साली में

सोते निधड़क

युगल नवोदित

चिकनी रेशम चादर तान।


शुभमस्तु !


13.101.2025●11.45 आ०मा०

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