621/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
करवा चौथ
मनाती पत्नी
पति हित माँग दुआ।
निर्जल व्रत
निरन्न भी रहती
चंद्रोदय को देख
पति के हाथों
पिए नीर वह
शेष न चिंता रेख
उम्र बढ़े
उसके प्रियतम की
करे न स्वांग जुआ।
सत्यवान की
सावित्री वह
जीतेगी यमराज
करे साधना
तन मन धन से
चमकायेगी ताज
दिखला देगी
इस दुनिया को
अब तक नहीं हुआ।
एक चाँद है
नील गगन में
एक आँख के पास
दुआ करे
नभ के चंदा से
उसे पूर्ण विश्वास
पूर्ण समर्पण
डिगे न किंचित
कण भर नहीं धुँआ।
शुभमस्तु !
15.10.2025● 12.30 प०मा०
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