643/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
एक ओर बी
एक ओर पी
बिचला हिंदुस्तान।
घटता बढ़ता
बी पी रहता
कब पड़ जाए दौरा
लिए कटोरा
घूम रहे वे
सुलभ न जिनको कौरा
चूहों की
हाथी से टक्कर
मसक संग हनुमान।
रहे बिलबिला
बी पी वाले
रहे निकल कर भाग
शायद
कौर मिले रोटी का
किस्मत जाए जाग
आदत में
दंशन ही जिसके
छोड़ें तीर -कमान।
पूँछ दबी
दोनों टाँगों में
किंतु तरेरे आँख
उड़ना चाह रहा
अंबर में
यद्यपि दुर्बल पाँख
सी सी की
चटनी की चाहत
गले अटकते प्रान।
शुभमस्तु !
25.10.2025●2.15 प०मा०
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