गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025

विजयदशमी का संदेश! [ अतुकांतिका ]

 602/2025





©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


जनता पर

नेताओं की

विजय हो रही है!

आप ही बताओ

सत्य किधर है ? 

इधर या उधर ?


सस्ताई के सिर

मँहगाई 

चढ़ रही है,

आप ही बताओ

बुराई 

इधर है या उधर?


भले जन पर

अत्याचारी हावी है

क्या कभी सोचा है

अच्छाई किधर है

इधर या उधर?


नारी पर 

दुष्कर्मी अत्याचार करें,

स्वतंत्र घूमें

व्यभिचार भरें,

बता दो आप ही

उचिताई 

इधर है या उधर ?


क्या यही

विजयदशमी की

गरिमा और गुरुत्व है !

असत्य पर सत्य की

बुराई पर अच्छाई की

विजय का औचित्य है?


वाह रे मेरे महान देश

क्या यही है

विजयदशमी का सुसंदेश?

जहाँ नारी  की अस्मिता बची

न बची निरीह जनता,

भ्रष्ट आचरण का साम्राज्य

सर्वत्र छाए हुए गुंडा नेता।


रावण खुलेआम 

घूम रहे हैं ,

और राम ढूंढ़े से भी

नहीं मिलते !

क्या इसी का नाम

विजयदशमी है ?

नाटकों से रावण नहीं

जला करते !


शुभमस्तु !


02.10.2025●9.15 आ०मा०

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