मंगलवार, 14 दिसंबर 2021

सपने 🧡 [ मुक्तक ]


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✍️ शब्दकार ©

🌳 डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'

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                        -1-

पूरे   जब   हो   जाते   सपने,

लगते हैं  तब  सब  ही अपने,

सपनों  को  यदि  करना  पूरा,

जीवन  में  लग   जाएँ  तपने।

                         -2-

सोने    में    जो   देखे  सपने,

कभी  नहीं   वे    होते अपने,

खुली आँख से चलते -फिरते,

जो   देखें    वे   सच्चे  सपने।

                        -3-

सपने   उनके    रंग  -  बिरंगे,

देख   रहे    सपने     मतमंगे,

ऊँची कुर्सी  दिखती   उनको,

काम   किए  यद्यपि  बदरंगे।

                        -4-

सपनों   का    संसार  निराला,

सुख-दुखअमृत विष का प्याला,

हँसना, रोना,   नभ  में  उड़ना,

लाल, हरा, पीला, सित, काला।

                        -5-

जो   पूरे   हों    देखें    सपने,

'शुभम' बनाया  मानव तप ने,

साधक  बनकर   करें साधना,

लख  बाधाएँ  लगें  न कँपने?


🪴 शुभमस्तु !


१४.१२.२०२१◆५.३०आरोहणं मार्तण्डस्य।

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