मंगलवार, 21 दिसंबर 2021

तुलसी -पूजा 🪴 [ बाल कविता ]

  

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✍️ शब्दकार ©

🪴  डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'

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माँ    तुलसी     की    पूजा  करती।

सुबह - शाम    घी - दीपक रखती।।


पहले   जल     से    स्वयं  नहाती।

फिर    वह   तुलसी   को नहलाती।।


बिछुआ  ,     चूड़ी      भी पहनाती।

लाल    चुनरिया    उन्हें    उढ़ाती।।


रोली   से      तुलसी     सज जाती।

फिर     माँ      बत्ती    धूप जलाती।।


फूलों    की    माला     भी    डाले।

छूकर   सिर   से   उसे     लगा ले।।


परिक्रमा     गिन- गिन  कर होती।

दिखलाती    दीपक     की ज्योती।।


पूजा     का    प्रसाद    हम   पाते ।

'शुभम'   आरती - मिल- जुल गाते।।


🪴 शुभमस्तु !


२१.१२.२०२१◆११.४५आरोहणं मार्तण्डस्य।

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