बुधवार, 27 मार्च 2024

बुरा नहीं कोई रंग [अतुकांतिका]

 156/2024

         


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'

   


बुरा नहीं कोई रंग

न काला न लाल,

बहता है रग-रग में एक

करे सुमन में कमाल,

काला भी अशुभ नहीं

रहस्य का तमरूप,

बुरी नजर से बचाता है

काम बेमिसाल।


रंग बिना दुनिया क्या

बहुरंगी ये संसार,

सबकी है पहचान अलग

तम या उजियार।


कहीं फूली सरसों पीत

कहीं महकता गुलाब,

यौवन का भी एक रंग

भर देता नई आब,

अपराजिता नीली सेत

कनेर पीली श्वेत

गुलाबी भी बोगनविलिया

सूरजमुखी नेक।


धतूरा भी कमतर क्यों

सेमल या पलाश,

गुलमोहर खिलखिलाए

वह देखो अमलतास।


दुनिया है रंग -रँगीली

करो मत उपहास,

सबको ही  'शुभम् 'मान दो

करना है प्रयास।



शुभमस्तु !


26.03.2024● 4.30प०मा०

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