शनिवार, 30 दिसंबर 2023

राम का प्रेम ● [ गीत ]

 592/2023

    

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●© शब्दकार

● डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'

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राम  का  प्रेम

मनुज का हेम

सदा शुभ हितकारी।


भीलनी  -  बेर

बिना  ही   देर

किए स्वीकार  सभी।

गीध की पीर

राम रणधीर

हरी, की कृपा तभी।।


 राम से बैर

नहीं है खैर

विनाशक व्यभिचारी।


सिया की खोज

न   होती   रोज

काम आए वानर।

वीर हनुमान

धीर जमवान

शत्रु खाते थे डर।।


लखन का कोप

राम   की  ओप

सिया को शुभकारी।


वनों  में  मोद

क्षीर तट शोध

राक्षसी  सुरसा- वध।

लंकिनी नाश

दानव हताश

गया सागर भी सध।।


राम   की  जीत

असुर भयभीत

'शुभम्' हित जयकारी।


● शुभमस्तु !


27.12.2023●4.00प०मा०

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