शुक्रवार, 22 दिसंबर 2023

जो चाहे भव पार ● [ गीत ]

 553/2023

           

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●© शब्दकार

● डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'

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राम -नाम की

जप ले माला

जो चाहे भव -पार।


समझ नहीं तू

नर प्रभु जी को

लिया मनुज का रूप।

त्रेतायुग में

आए भू पर

पुरी  अयोध्या   भूप।।


शबरी केवट 

वानर तारे

रावण का उद्धार।


कण -कण में जो

राम रमा है 

क्षण- क्षण प्रातः -शाम।

भरत शत्रुघ्न

लखन साथ हैं

रूप ललित अभिराम।।


कौशल्या माँ

और सुमित्रा

दशरथ पिता सकार।


सीता -माता

जनक सुता का

मिला राम को साथ।

हनुमत जैसे 

सेवक प्यारे

करते जगत सनाथ।।


मर्यादा का

रूप राम जी

जानें जग उजियार।


●शुभमस्तु !


22.12.2023●1.00प०मा०

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