सोमवार, 29 दिसंबर 2025

उषा जगी प्राची में भोली [ गीतिका ]

 791/2025





©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


उषा     जगी     प्राची   में    भोली।

लगा   भाल  पर  अरुणिम   रोली।।


भानु   जगाया   उठो    चलो   अब,

जाग  उठे     खगदल    हमजोली।


चह- चह  कर   खग   चहक   रहे  हैं,

सुना - सुना   कर   मधुरिम  बोली।


गोला  लाल    उठा    जब    ऊपर,

लगा   खेलता      अंबर      होली।


कुकड़ -  कुकड़   कूँ   करते   मुर्गे,

निकल  पड़ी  बतखों  की    टोली।


उधर  गली  के उस   नुक्कड़   पर,

बालक  खेल    रहे     हैं      गोली।


'शुभम्'  सुबह  का  दृश्य    मनोहर,

जग कर्ता  ने    निधियाँ      खोली।


शुभमस्तु !


29.12.2025 ● 5.15 आ०मा०

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