783/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
उपलब्धि का बिरवा
कभी निर्मूल नहीं होता
अनायास ही उस पर
दल फूल फल नहीं आते
उसकी भी अपनी
जीवंत कहानी है।
कभी न कभी
किसी न किसी तरह
हुआ होगा
एक नन्हे बीज का अंकुरण
तभी वह आज
एक सघन विटप है।
कुछ ही पलों में
या दो एक दिन में
इतिहास नहीं बनते
इसकी भी एक
समृद्ध शृंखला है।
आइए हम
बोएँ कर्मों के कुछ बीज
ताकि कल लहलहाए
वह महान बिरवा।
नहीं देता
ईंट का पत्थर दिखाई
बस शीश का कलश
दिखाई देता है
दबा रहता है वह
नींव में
धरती के गर्भ में गहरा।
शुभमस्तु !
26.12.2025● 5.45 आ०मा०
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