शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025

अनुरोध [ सोरठा ]

 782/2025


    


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


सुनिए  कृपानिधान, करते  हैं अनुरोध हम।

हमें मूढ़ मति  जान,सबका दुख हर लीजिए।।1

पड़े मनुज  पर नेक,असर बड़ा अनुरोध का।

मति में भरे विवेक, सुनता  भाव विनम्र तो।।2


याचक बन कर दीन,काम किसी से चाहते।

लेश न मेख न मीन,करें सदा अनुरोध ही।।3

लगे उग्र  या  क्रोध,कर मत ऐसा आचरण।

जगा  हृदय में  बोध,सदा करें अनुरोध ही।।4


हो अनुरोध   विनम्र,हृदय द्रवित होता सदा।

यद्यपि कोई  उम्र  ,कटुक  शब्द  बोलें नहीं।।5

करके   पूर्ण  विचार, अनुरोधी की बात पर। 

बदलें निज व्यवहार,मनन करें अनुरोध का।।6


जब विनम्र अनुरोध,किया  राम ने सिंधु  से।

दया भाव  का  बोध, दिया पंथ तब सिंधु  ने।।7

सदाचरण  अनुरोध,  धृष्ट कभी करता नहीं।

देख लिया  कर शोध, रहे अहं में मग्न वह।।8


करे   सूक्ष्म अनुरोध,  बिल्ली  चूहे  से नहीं।

दिखलाती बस क्रोध,समझे मुँह का ग्रास ही।।9

अति विनम्र अनुरोध, शत्रु शत्रु से क्यों करे।

बने उग्र कर  क्रोध,जान  रहा  कमजोर है।।10


मानव बने महान,महत भाव अनुरोध का।

जाने सकल जहान,मैल धुले मन का सभी।।11


शुभमस्तु !


24.12.2025●8.00प०मा०

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