सोमवार, 22 दिसंबर 2025

मौन हुए हैं घर -घर टीवी [ नवगीत ]

 749/2025


       


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


मोबाइल की

चटुल चाल से

मौन हुए हैं घर-घर टीवी।


घर भर में

आवाज गूँजती

न्यूज़ कभी फिल्मी गानों की

विज्ञापन

साबुन मंजन के

खबरें कभी पुलिस थानों की

अब देखो

सब बिजी हुए हैं

घर के बालक भाभी बीवी।


हाथ-हाथ में 

मोबाइल है

हुआ आदमी हर परजीवी

नहीं उम्र का

बंधन कोई

बाँध न जाने संतति नीवी

हो मजदूर

धनिक या कोई

हिलती हो या धड़ से ग्रीवी।


स्वागत नहीं

अतिथि का होता

नहीं पूछता पीना पानी

अलग -अलग

खोए हैं घर में

बदल गई है सभी कहानी

सब्जी चाय जले

चूल्हे पर

महक रहा है जलता घी भी।


शुभमस्तु !


18.12.2025●11.45 आ०मा०

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