749/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
मोबाइल की
चटुल चाल से
मौन हुए हैं घर-घर टीवी।
घर भर में
आवाज गूँजती
न्यूज़ कभी फिल्मी गानों की
विज्ञापन
साबुन मंजन के
खबरें कभी पुलिस थानों की
अब देखो
सब बिजी हुए हैं
घर के बालक भाभी बीवी।
हाथ-हाथ में
मोबाइल है
हुआ आदमी हर परजीवी
नहीं उम्र का
बंधन कोई
बाँध न जाने संतति नीवी
हो मजदूर
धनिक या कोई
हिलती हो या धड़ से ग्रीवी।
स्वागत नहीं
अतिथि का होता
नहीं पूछता पीना पानी
अलग -अलग
खोए हैं घर में
बदल गई है सभी कहानी
सब्जी चाय जले
चूल्हे पर
महक रहा है जलता घी भी।
शुभमस्तु !
18.12.2025●11.45 आ०मा०
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