759/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
घण्टा मिनट
घड़ी भर में क्या
चरित देखने पाओ।
चरित नहीं है
इत्र सुगंधित
उड़ता फिरे हवा में
चरित नहीं है
च्यवनप्राश भी
करता काम दवा में
लड़की
चला फिरा कर देखी
चाल चला गुण गाओ।
नारी-पुरुष
चरित के भीतर
नित्य नया रँग बदले
साँस आखिरी भी
चलती हो
साफ़ न हो मन गदले
गोरी चिकनी
खाल देखकर
दुलहिन चुन लें आओ।
अभिनयबाज
नारि-नर दोनों
समझो उभय पहेली
अतिशयोक्तियां
बूझ न पाओ
भूली भुवन हवेली
चुन लो
या मत चुनो
किंतु आजीवन साथ निभाओ।
शुभमस्तु !
21.12.2025 ●12.15 प०मा०
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[1:05 pm, 21/12/2025] DR BHAGWAT SWAROOP:
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