शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025

फोर्थ जेंडर! [ अतुकान्तिका ]

 784/2025


      

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


सुना है

राजनीति से आदमी

ऊपर उठ जाता है,

पर मुझे लगता है

जितना ऊपर उठता है

उतना आदमीपन से

नीचे गड़ जाता है।


यदि विश्वास न हो

तो नेताओं की ओर

नज़र उठाकर देख लो

कि उनमें कितने

आदमी बचे हैं।


आप स्वयं ही

तय कर लें कि

आपको आदमी बने रहना है

या बन जाना है नेता,

यदि एक बार नेता बन गए

तो आदमी बन पाना

सम्भव ही नहीं।


आप कहेंगे कि

क्या नेता आदमी नहीं होता?

पूरे देश के नेताओं पर

नज़र घुमा कर देख लीजिए 

कि उनमें आदमीपन 

कितना शेष है,

क्योंकि वह समझता है

कि हर आदमी उसके पीछे

चलने वाला मेष है।


नेता बनने के बाद

उसकी सोच

 बदल जाती है,

स्त्री रह जाता है

न पुरुष 

बस नेता कहा जाता है,

यह थर्ड जेंडर से अलग

फोर्थ जेंडर बन जाता है।


शुभमस्तु !


26.12.2025●6.30आ०मा०

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