मंगलवार, 9 दिसंबर 2025

जन-जन डूबा अँधियारों में [ सजल ]

 719/2025

       


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


समांत          :आरों

पदांत           : में

मात्राभार       : 16.

मात्रा पतन     : शून्य


उलझा      है     भारत     नारों   में।

नेताजी       बैठे        कारों      में।।


सोचते      नहीं  वे    हो    विकास।

वे  फँसे  हुए     नित   हारों     में।।


जैसे     भी    मिले     मात्र   सत्ता।

वे     खेल      रहे  हैं    तारों     में।।


अब  युवा  आज  का  भटक  रहा।

मन  बुद्धि  लगी  सब   यारों    में।।


बागों  में     कैसे     खिलें    फूल।

फुलवारी    भटकी     खारों    में।।


निज  पति  से जिनको  प्यार नहीं।

ललनाएँ       उलझीं   जारों    में।।


अब  'शुभम्'  देश  का  होगा क्या।

जन- जन   डूबा   अँधियारों    में।।


शुभमस्तु !


08.12.2025●8.30आ०मा०

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