758/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
संग सेहत के
जुड़ा है
स्वाद का रिश्ता पुराना।
देह से ही
रंग सारे
हाथ दो जोड़े खड़े हैं
जीभ के
सम्बंध प्यारे
षटरसों से ही जुड़े हैं
देह हो
सुंदर सजीली
चाहती क्या- क्या चुराना।
देख लेतीं
आँख दो-दो
जो न कोई देख पाए
कान भी
सुनते वही सब
जो नहीं संदेश लाए
पाँव जाते हैं
वहीं पर
था पड़ा तब कुनमुनाना।
आँत का सम्बंध
रसना से
जुड़ा, जुड़ना जरूरी
कुलबुलाती
जोर से तब
जीभ क्यों रहती अधूरी
जो न भाए
देह को जब
देखते ही दुर्दुराना।
शुभमस्तु !
21.12.2025●11.30 आ०मा०
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