760/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
झरबेरियों से
बेर तो
तोड़े हैं हमने।
अँगुलियों
कपड़ों में
जब काँटा चुभा है
स्वाद
खटमिट्ठा
अभी रसना खुभा है
गुलकांकरी के
लाल फल
छोड़े न हमने।
पाँव नंगे
जंगलों में
गोंद ढूँढ़ा
खोल सरकंडे
उड़ाया है
जमूड़ा
जंगली फल
डाल से
जोड़े हैं हमने।
झाड़ में
जाकर
करीलों में हमीं ने
टेटियाँ तोड़ीं
भरी
झोलीं सभी ने
बाग में जा
आम्र फल
फोड़े हैं हमने।
शुभमस्तु !
21.12.2025●1.00प०मा०
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