सोमवार, 22 दिसंबर 2025

हमें नियम से करना क्या? [ नवगीत ]

 747/2025


     


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'

    


मंत्री जी हैं

पिता हमारे

हमें नियम से करना क्या ?


हम जो कर दें

नियम वही है

चुसने वाले आम नहीं

हम जो कह दें

उसे मानना

मानेंगे ना  उसे   कहीं ?

पुलिस काँपती

अधिकारी भी

हमें नियम से करना क्या?


हम हैं शासक

तुम जनता हो

मात्र पांव की जूती हो

सत्तासन पर

हमीं विराजे

निज ताकत क्या कूती हो

सुविधाएं

सब सरकारी हैं

हमें नियम से करना क्या?


आई ए एस पर

हुक्म हमारा

यों ही सरपट चलता है

इच्छा के

क्या बिना हमारी 

जन का सूरज ढलता है?

इच्छा ही

आदेश हमारा

हमें नियम से करना क्या ?


शुभमस्तु !


17.12.2025●3.00प०मा०

                  ●●●

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

किनारे पर खड़ा दरख़्त

मेरे सामने नदी बह रही है, बहते -बहते कुछ कह रही है, कभी कलकल कभी हलचल कभी समतल प्रवाह , कभी सूखी हुई आह, नदी में चल रह...