750/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
आज आदमी की
चालों से
सावधान आदमी हुआ है।
जनसेवा के
भगवा रँग के
नीचे कितना काला-काला
पैग लगा करते
चंदे से
और साथ में गरम मसाला
समझ सको तो
समझो जन को
नारों के तल खुदा कुआ है।
हँसता हुआ
चित्र छप जाए
आने वाले अखबारों में
नाम सुर्खियों में
हो अपना
सबसे श्रेष्ठ दिखूँ चारों में
दुनिया जाने
इस उत्सव की
बड़ी हमारी यही बुआ है।
नाक रगड़ता
देवालय में
तिलक त्रिपुंड सजा माथे पर
मंचों पर
चिंघाड़ रहे कवि
बदल-बदल कर अपने तेवर
माँग रहा
मैं बनूँ चैम्पियन
इष्टदेव से यही दुआ है।
शुभमस्तु !
18.12.2025 ●12.45प०मा०
●●●
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें