766/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
नाम में
पत्थर जड़े हैं
इसलिए पत्थर हुए वे।
लाल हीरा
और नीलम
श्वेत मोती की लड़ी है
जड़ित हैं
पुखराज पन्ना
नाम की महिमा बड़ी है
असर कुछ
ऐसा हुआ है
अनमोल ही पत्थर हुए वे।
काँच की चूड़ी
न रखता
नाम कोई ,डर बड़ा है
टूट जाए
लगे झटका
पर नगीना तो कड़ा है
मजबूतियां
पहले जरूरी
कनक में पत्थर हुए वे।
सिंह हैं
लाखों हजारों
बैल या गर्दभ नहीं वे
अश्व गीदड़
भी न कोई
भैंस के संदर्भ ही वे
अमर होने की
तमन्ना
आभूषणी पत्थर हुए वे।
शुभमस्तु !
22.12.2025●1.145 आ०मा०
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